माँ का दूध और ऊपरी दूध में क्या अंतर होता हैं?

गाय का दूध : यदि ऊपर का दूध देना है, तो इसमें एक संभावना गाय के दूध की भी होती है। यह दूध मां के दूध से मेल नहीं खाता। दोनों भिन्न होता है।

गाय के दूध तथा माँ का दूध में अंतर

1. गाय के दूध में प्रोटीन तथा वसा मां के दूध के मुकाबले अधिक होता है।

2. गाय के दूध में उतनी मिठास नहीं होती, जितनी मां के दूध में होती है।

3. शिशु की आयु के साथ मां के दूध का संगठन स्वतः बदलता रहता है, जो गाय के दूध में तो नहीं हो सकता।

4. जैसे-जैसे बच्चे की आयु बढ़ती जाती है, मां के दूध में प्रोटीन, शर्करा, वसा आदि तत्त्व बढ़ते रहते हैं।

5. गाय के दूध में एक ‘केसिनोजिन' नामक प्रोटीन होता है। यह आमाशय में छैना बनाता है, वह कड़ा होता है। इस छैना का पाचन बच्चे के लिए इतना सरल नहीं होता। देखा गया है कि जब बच्चे को बदहजमी होती है, दस्त लगते हैं, तो इस दस्त के साथ छैने के टुकड़े भी निकलते हैं। मतलब यह छैना नहीं पच पाया।

6. गाय का दूध पीने से बच्चे को कुछ पाचन-विकार होने की शिकायत हो जाती है। बच्चे का पेट फूलने लगता है। दर्द महसूस करता है।

7. माता का दूध जब अमाशय में जाता है, तो इससे भी छैना बनता है, मगर यह उतना सख्त नहीं होता। बच्चा इसे आसानी से पचा लेता है।

8. अन्य तकलीफें जैसे बदहजमी होना, पेट दर्द करना, पेट फूलना, ये शिकायतें भी नहीं होतीं।

ये गुणों में अंतर ही है, जो गाय के दूध की बजाए मां का दूध या फिर डिब्बे का दूध देने की सलाह दी जाती है।

 

पहले दो-तीन महीने तक ध्यान दें :

1. एक बात ध्यान में रखने योग्य है कि पहले दो-तीन महीनों में शिशु को वसा अधिक मात्रा में चाहिए।

2. प्रोटीन की मात्रा कम चाहिए, क्योंकि इन दो-तीन महीनों में उम्र में वह कम प्रोटीन पचा सकता है।

3. बच्चों के लिए जो दूध तैयार हो, उसमें प्रोटीन से वसा दोगुनी होना–संतुलित दूध होगा।

4. साढे चार किलो वजन वाले बच्चे के लिए यदि शुद्ध गाय का दूध प्राप्त हो सके, तो प्रतिदिन आधा लीटर दूध चाहिए। यह शुद्ध दूध की बात है।

5. आप पानी मिलाकर, दूध को माता के दूध में पाए जाने वाले अवयवों के समान बना सकते हैं-यह संभव भी है।

बच्चो के लिए ऊपरी दूध

1. साधारण गाय के दूध से अच्छी कंपनी का बना डिब्बाबंद सूखा दूध ठीक होता है।

2. डिब्बे वाला सूखा दूध पिलाने से बच्चे को वायु या पाचन वाली कोई परेशानी नहीं होती। पेट भी ठीक रहता है।

3. डेक्स्ट्रो-माल्टोज साधारण चीनी से ज्यादा ठीक मानी गई है।

4. साधारण मीठे या चीनी से बच्चों को दस्त लग सकते हैं, इससे नहीं।

5. डेक्स्ट्रो-माल्टोज का अपना मीठा कम होता है। यह मां के दूध की मिठास से मेल खाता है। जिन्हें चीनी वाले, अधिक मीठे दूध की आदत पड़ जाए, वे मां के दूध को पीना इसलिए भी त्याग देते हैं, क्योंकि यह कम मीठा होता है।

6. ग्लैक्सो, ड्यूमैक्स, अमूल आदि कंपनियां जो दूध तैयार कर डिब्बों में भेजती हैं, वे मिठास का, क्रीम का, बच्चे की आयु का, हर बात का ध्यान रखती हैं। ये डिब्बों पर बच्चों की आयु का जिक्र कर देते हैं, जिन्हें अब ‘नबर से सूचित किया जाने लगा है। अतः ये सूखे दूध आम दूध से कहीं उत्तम हैं।

7. गाय का दूध अपने साथ कोई रोगाणु भी ला सकता है। कहां से चला, किस बर्तन में आया, किस-किस के हाथ लगे, इस प्रकार पता नहीं उस दूध में कब कोई रोगाणु प्रवेश कर जाए, जो बाद में बच्चे के पेट में जाकर उसे अस्वस्थ कर दे। इसलिए बच्चे को मां का दूध ही पिलाएं, जितनी कमी हो, वह अच्छी कंपनी के बने सूखे दूध से पूरा करें।

शिशु योग दूध बनाने का घरेलु उपाय

1. गाय के दूध में उचित मात्रा में जल मिलाकर इसे पतला कर लें, जिससे अधिक प्रोटीन तथा वसा कम हो जाए। जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, पानी मिलाना घटाते रहें।

2. गाय के दूध में शर्करा डालकर इसे उतना मीठा कर लेते हैं, जितनी इसमें कमी होती है। यह अनुमान से होता है। धीरे-धीरे आप इसकी अभ्यस्त भी हो जाएंगी।

3. आप अपने अनुभव से मलाई हटाकर, या न हटाकर, सीधा उबालकर, ठीक तापमान पर लाकर, बच्चे को पिला सकती हैं। धीरे-धीरे आप स्वयं नियंत्रण रखने, इसे बच्चे की आयु अनुसार पीने के लिए उपयोगी रखना सीख जाएंगी।

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