नवजात शिशु के कपड़े कैसी होनी चाहिए|

यह बिलकुल भी जरूरी नहीं कि शिशु के वस्त्र महंगे हों, बल्कि ये मौसम के अनुरूप हों, आसानी से पहनाए-उतारे जा सकें, बच्चे को किसी प्रकार की कठिनाई न आए तथा पहने हुए कपड़े उसके विकास में बाधा न बनें।

नवजात शिशु के कपड़े

1. सर्दी में पहनने वाले वस्त्र ऊनी होने चाहिए।

2. गर्मी के मौसम में सूती कपड़े ठीक रहेंगे।

नवजात शिशु के कपड़े मौसम के अनुकूल होना चाहिए। गर्मी के मौसम में इसके विपरीत चलना होगा। सर्दी में तो कोशिश होती है कि शिशु के शरीर का तापमान बना रहे। इसका ह्रास न हो। गर्मी के मौसम में कोशिश होती है कि मुन्ने के शरीर का तापमान न बढ़े, बल्कि घटे ताकि उसे अधिक गर्मी न सहनी पड़े। सर्दी में ताप को अवशोषित करने वाला वस्त्र पहनाया था, अब ताप का अच्छा वाहक हल्का वस्त्र हो, ताकि शरीर की आंतरिक गर्मी शरीर में बनी रहे, निकलती रहे।

सूती कपडे ताप के अच्छे वाहक होते हैं, अतः मलमल, लट्टा या पतला खद्दर पहनाएं, तो शरीर की गर्मी खारिज होती रहेगी। बच्चा थोड़ी ठंडक पाकर सुविधा महसूस करेगा, गर्मी बरदाश्त करने लगेगा।

आर्द्रता को जज्ब करने वाला, अपने में समा-सुखा लेने वाला कपड़ा बच्चे के लिए सदा उपयोगी माना जाता है। पसीना केवल गर्मी के मौसम में ही नहीं, सर्दी के मौसम में भी निकलता है। यदि वस्त्र ऐसा हो, जो पसीने को सोख सके, तब बच्चे के स्वास्थ्य के लिए यह अच्छा रहेगा।

इस स्थिति को निपटने के लिए दो रास्ते हैं।

1. रेशम अपने आप में आर्द्रता सोख लेता है। तापमान को भी बनाए रखता है। ह्रास नहीं होने देता। इसलिए उचित है कि शिशु को पहनाना चाहिए।

2. ऊन भी पसीना सोख लेता है। मगर पसीना सोखकर यह गीला-सा रहने लगता है। तब यह ताप की रक्षा नहीं कर सकता। इसलिए यह तब इतना लाभकारी नहीं, जब उसे पसीना आता हो।

हवा तथा सूर्य की किरणें वस्त्रों से अंदर प्रवेश कर सकें, ताकि शिशु के तन को धूप तथा हवा दोनों प्राप्त हो सके, मौसम के अनुसार ऐसे वस्त्र भी पहनाने चाहिए। सूती कपड़ों में यह खूबी बहुत ज्यादा होती है। जो वस्त्र कसे हुए ताना-बाना वाले न हों, वे अच्छे रहते हैं।

शिशु का शरीर बहुत कोमल होता है। उसका चर्म अधिक खुरदरापन बरदाश्त नहीं कर सकता। उसके तन पर मुलायम कपड़ा चर्म के लिए ठीक रहता है। इसलिए सूती तथा रेशमी कपड़े ठीक रहते हैं।

शिशु के वस्त्र अधिक मैले हो जाते हैं। जल्दी बदलने पड़ते हैं। अतः वस्त्र ऐसे हों जिन्हें :

  • आसानी से धोया जा सके।
  • ये बार-बार धोने से रंग-रूप-आकार से खराब न हों।
  • ये धोने पर सिकुड़े नहीं।
  • जब धोएं तो आसानी से गंदगी उतर जाए। चिपकी न रहे। इसके लिए तो सूती कपड़े सबसे अच्छे होते हैं।

शिशु के लिए जब भी कपड़ा बनवाएं या बना-बनाया खरीदें, ये भारी न हों। यदि भारी होगा तो बच्चे के हाथ, पांव, टांगे आसानी से हरकत नहीं कर सकेंगी।

आपके शिशु के कपड़े सदा ढीले हों, तो बहुत अच्छा होगा इन्हें पहनाने में, उतारने में कोई कठिनाई न आए। यदि उनको सामने से खोलने के लिए बटन, टिच बटन हो, तो अधिक आसानी रहती है। यदि गले से उतारने वाले हों, तो इनका गला खुला होना जरूरी है। तभी आसानी से उतारे जा सकते हैं। वस्त्र शरीर को कहीं से भी कसने वाले न हों। खुले रहें, शरीर बंधा-बंधा न रहे।

ध्यान रखे: जब सर्दी के मौसम में ऊनी वस्त्र पहनाने हों, तो इनके नीचे आप सूती बनियान, सूती फिराक, सूती कुर्ता आदि पहना सकते हैं, ताकि ऊन की चुभन महसूस न हो।

वस्त्रों का रंग

शिशु के कपड़ों का चयन करते समय रंगों को भी ध्यान में रखा जाता है :

1. यदि कपड़ा गहरे रंग का है, तो यह ताप का कम वाहक होगा। अतः गरम रहता है। शरीर की गर्मी का ह्रास नहीं होने देता। यह ज्यादा ठीक रहता है।

2 श्वेत या हलके रंगों वाले वस्त्र ठंडे रहते हैं। अतः शिशुओं के लिए, बच्चों के लिए गहरे रंगों वाले वस्त्र अधिक ठीक रहते हैं, जो बच्चे के शरीर की गर्मी को नष्ट होने से बचा सकें।

(और पढ़े:- नवजात शिशु में समय के साथ परिवर्तन होने के लक्षण)

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